30-01-2024

क्या आपकी सूर्य की महादशा चल रही है

सूर्य की महादशा  

 

शास्त्र के अनुसार, नवग्रह के राशि परिवर्तन से लेकर उनकी महादशाओं का हर व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव पड़ता है। कई लोगों को महादशा का शुभ फल प्राप्त होता है, तो कई लोगों के जीवन से मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं लेती है। ऐसे ही ग्रहों के राजा सूर्यदेव की बात करें, तो इस ग्रह की महादशा पूरे 6 साल की होती है। सूर्यदेव सिंह राशि के स्वामी है। इसके साथ ही सूर्य मेष राशि में उच्च और तुला राशि में नीच माने जाते हैं। ऐसे में सूर्य की महादशा होने पर व्यक्ति हर क्षेत्र में सफलता मिलने के साथ-साथ करियर में ऊंची उड़ान भरते हैं। इसके साथ ही समाज में मान-सम्मान और बिजनेस में बढ़ोतरी होती है।

शास्त्र के अनुसार सूर्य की महादशा में लोगों के जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं। ये लोग समाज में मान-सम्मान के साथ बुलंदी को छूते हैं। इसके साथ ही सरकारी नौकरी मिलने के आसार अधिक होते है।

                                        सूर्य की महादशा का प्रभाव

 

यदि आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति शुभ है

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति शुभ है, तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है। हर इच्छा पूरी होती है। अगर सूर्य अपनी मित्र राशियों में या उच्च का होता है, तो जातकों को हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है। लंबे समय से रुके काम पूरे होते हैं और बिगड़े हुए काम भी बनने लगते हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक पद की तैयारी कर रहे जातकों को जल्द सफलता हासिल होती है। ऐसे लोगों को मान सम्मान प्राप्त होता है उन्हें सरकार के द्वारा लाभ प्राप्त होता है या सरकारी नौकरी प्राप्त हो सकती है | 

यदि कुंडली में सूर्य की स्थिति शुभ नहीं है

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति अशुभ है, तो व्यक्ति के स्वभाव पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे व्यक्ति अधिक क्रोधी होने के साथ अंहकारी होते हैं। इसके साथ ही इन लोगों के पिता के साथ संबंध अच्छे नहीं होते हैं। इसके साथ ही सूर्य की स्थिति खराब होने के कारण आंख संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सूर्य की महादशा के उपाय

रोजाना भगवान सूर्य को तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए। रविवार का दिन भगवान सूर्य से संबंधित है। इसलिए रविवार के दिन गेहूं और तांबा का दान करें। रविवार को सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ पीपल के पेड़ में भी जल चढ़ाएं। नियमित रूप से आदित्यह्रदय स्त्रोत का पाठ करना लाभकारी सिद्ध होगा। सूर्य की महादशा में जातक नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करें-

ॐ घृणी सूर्याय नम:

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